दुर्गे दुर्घट भारी तुजवीण संसारी दुर्गा देवी आरती संस्कृत आरती : धनंजय महाराज मोरे

आरती

श्री दुर्गायाः आरतिः ||

(मूल मराठी- दुर्गे दुर्घट भारी)

दुर्गे सुदुर्गमोऽस्ति त्वदृते संसारः

अनाथनाथे अम्बे अस्तु कृपाप्रसरः |

वारय वारय जननम् मरणम् वारय मे

अस्मि विपत्तिषु पतितो मातस्तारय मे || १||

                       || जय देवि जय देवि ||

जय देवि जय देवि महिषासुरमथिनि |

सुरवर- ईश्वर- वरदे संजीवनि तारिणि || धृ. ||

त्रिभुवन- भुवने नाऽन्या भजते त्वत्साम्यम्

वेदचतुष्कम् श्रान्तम् त्वाम् स्तोतुम् अशक्तम् |

विवदत् प्रवाहपतितम् षट्शास्त्राधारम्

किन्तु त्वम् भक्तेषु प्रसीदसि क्षिप्रम् || २||

                       || जय देवि जय देवि ||

प्रसन्न- वदने दासे प्रसीदसि त्वरितम्

क्लेशान् मोचय मातश्छेदय भवपाशम् |

अम्बे त्वदृते को माम् कुर्यात् पूर्णाशम्

नरहरि- मन आस्ते तव पदपंकजलीनम् || ३||

                       || जय देवि जय देवि ||

|| जय जय दुर्गे जगदम्बे || भक्तान् तारय हे अम्बे ||

नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः |

नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणताः स्म ताम् ||

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