घृताची अप्सरा

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घृताची संकलक : धनंजय महाराज मोरे Dhananjay Maharaj More 9422938199//9823334438 Email : more.dd819@gmail.com घृताची प्रसिद्ध अपसरा जो कश्यप ऋषि तथा प्राधा की पुत्री थी। पौराणिक परंपरा के अनुसार घृताची से रुद्राश्व द्वारा १० पुत्रों, कुशनाभ से १०० पुत्रियों, च्यवन पुत्र प्रमिति से कुरु नामक एक पुत्र तथा एकमत से वेदव्यास से शुकदेव का जन्म हुआ। एक बार भरद्वाज ऋषि ने इसे गंगा में स्नान करते देखा और उनका […]

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महाभारत ग्रंथ लेखन जन्म कथा

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महाभारत ग्रंथ लेखन जन्म कथा संकलक : धनंजय महाराज मोरे Dhananjay Maharaj More 9422938199//9823334438 Email : more.dd819@gmail.com वेद व्यास से सुनकर भगवान गणेश महभारत लिखते हुए महाभारत में ऐसा वर्णन आता है कि वेदव्यास जी ने हिमालय की तलहटी की एक पवित्र गुफा में तपस्या में संलग्न तथा ध्यान योग में स्थित होकर महाभारत की घटनाओं का आदि से अन्त तक स्मरण कर मन ही मन में महाभारत […]

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वेदव्यास

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वेदव्यास संकलक : धनंजय महाराज मोरे Dhananjay Maharaj More                                                  9422938199//9823334438                                             […]

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कलियुग ची वंशावली

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कलियुग वंशावली संकलक : धनंजय महाराज मोरे   कुरु वंश – महाभारत पर्यान्त वंशावली 2ब्रहाद्रथ वंश 3मगध वंश 4नन्द वंश कुरु वंश – महाभारत पर्यान्त वंशावली[स्रोत सम्पादित करें] परीक्षित २ |हर्णदेव | रामदेव | व्यासदेव * द्रौनदेव सिंहदेव | गोपालदेव | विजयनन्द | सुखदेव | रामन्देव सन्धिमन् | मरहन्देव | चन्द्रदेव | आनन्ददेव | द्रुपददेव हर्नामदेव | सुल्कन्देव | जनमेजय ३ | शतानीक १ | अश्वमेधदत्त अधिसीमकृष्ण | निचक्षु | उष्ण | चित्ररथ | शुचिद्रथ वृष्णिमत् | सुषेण | सुनीथ | रुच | नृचक्षुस् सुखीबल | परिप्लव | सुनय | मेधाविन् | नृपञ्जय | ध्रुव, मधु|तिग्म्ज्योती बृहद्रथ | वसुदान |शत्निक (बुद्ध कालीन )| उदयन | अहेनर | निरमित्र (खान्दपनी ) |क्षेमक ब्रहाद्रथ […]

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सोळा सोमवार माहात्म्य ओवी बद्ध dhananjay maharaj more

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सोळा सोमवार माहात्म्य ओवी बद्ध dhananjay maharaj more धनंजय महाराज मोरे 9422938199//9823334438 श्रीगणेशाय नम: ॥ वैदर्भदेशीं परम पवित्र । अमरावती नामें एक नगर । तेथें शिवालय महाथोर । जें कां अपूर्व त्रिभुवनीं ॥ १ ॥ तेथें कोणे एके वेळीं । शिवपार्वती एके स्थळी । उभयतां येऊनि देउळीं । सहजस्थिती क्षण एक ॥ २ ॥ स्थळ […]

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