दुर्गे दुर्घट भारी तुजवीण संसारी दुर्गा देवी आरती संस्कृत आरती : धनंजय महाराज मोरे

आरती

श्री दुर्गायाः आरतिः || (मूल मराठी- दुर्गे दुर्घट भारी) दुर्गे सुदुर्गमोऽस्ति त्वदृते संसारः अनाथनाथे अम्बे अस्तु कृपाप्रसरः | वारय वारय जननम् मरणम् वारय मे अस्मि विपत्तिषु पतितो मातस्तारय मे || १||                        || जय देवि जय देवि || जय देवि जय देवि महिषासुरमथिनि | सुरवर- ईश्वर- वरदे संजीवनि तारिणि || धृ. || त्रिभुवन- भुवने नाऽन्या […]

More